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[5/20, 6:00 PM] रामघाट रोड़ पर शाहपà¥à¤° के पास इनà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤¨ आयल का टैंकर अनियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ होकर पलट गया. शà¥à¤•à¥à¤°à¤µà¤¾à¤° सà¥à¤¬à¤¹ हà¥à¤¯à¥€ घटना की जानकरी मिलने पर इलाका पà¥à¤²à¤¿à¤¸ मौके पर पहà¥à¤‚ची ! टैंकर के à¤à¥€à¤¤à¤° खचाखच गायों को देखकर पà¥à¤²à¤¿à¤¸ के होश उड़ गà¤. पà¥à¤²à¤¿à¤¸ ने आनन-फानन में टैंकर में à¤à¤°à¥€ गायों को बहार निकला. सेकड़ो गायों में से आधा दरà¥à¤œà¤¨ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ गाय मर चà¥à¤•ी थी. पà¥à¤²à¤¿à¤¸ ने जेसीवी मशीन मांगकर गया को दफ़न करा दिया !
17 मे 2016 - 12:15 AM IST
नवी दिलà¥à¤²à¥€ - गोवंश व गोशाळांचे जतन करणà¥à¤¯à¤¾à¤šà¤¾ आदेश केंदà¥à¤° सरकारने दिला आहे. या पारà¥à¤¶à¥à¤µà¤à¥‚मीवर देशी गायींचà¥à¤¯à¤¾ जतनासाठी खास दूध उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ पà¥à¤°à¤•लà¥à¤ª उà¤à¤¾ करणे, महातà¥à¤®à¤¾ गांधी राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ रोजगार हमी योजनेंतरà¥à¤—त (मनरेगा) चारानिरà¥à¤®à¤¿à¤¤à¥€ करणे, गायींची बेकायदा तसà¥à¤•री व कतà¥à¤¤à¤²à¤–ानà¥à¤¯à¤¾à¤‚वर कारवाई करणà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¤¾à¤ ी पशू कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ खाते अधिक सकà¥à¤·à¤® बनविणे अशा उपाययोजना करणà¥à¤¯à¤¾à¤¤ येत आहेत.
दिलà¥à¤²à¥€à¤¤ सोमवारी आयोजित केलेलà¥à¤¯à¤¾ "गोवंश' व "गोशाळा' या विषयावरील राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ चरà¥à¤šà¤¾à¤¸à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤¤ केंदà¥à¤°à¥€à¤¯ वनमंतà¥à¤°à¥€ पà¥à¤°à¤•ाश जावडेकर व कृषी मंतà¥à¤°à¥€ राधामोहनसिंह यांनी ही माहिती दिली. राजà¥à¤¯ सरकार, शेतकरी व दूध उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤•ांना गायींचा सांà¤à¤¾à¤³ करणà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¤¾à¤ ी सहकारà¥à¤¯ करणà¥à¤¯à¤¾à¤šà¥‡ आवाहन तà¥à¤¯à¤¾à¤‚नी केले. जावडेकर मà¥à¤¹à¤£à¤¾à¤²à¥‡," "गायींना चरणà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¤¾à¤ ी राखीव असलेली गायरान जमीन सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ ठेवणà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¤¾à¤ ी तà¥à¤¯à¤¾à¤‚चे मंतà¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯ उपाययोजना आखीत आहे. रोजगार हमी योजनेसारखà¥à¤¯à¤¾ सरकारी उपकà¥à¤°à¤®à¤¾à¤‚चà¥à¤¯à¤¾ माधà¥à¤¯à¤®à¤¾à¤¤à¥‚न गायींसाठी पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• चाऱà¥à¤¯à¤¾à¤šà¥€ निरà¥à¤®à¤¿à¤¤à¥€ करणà¥à¤¯à¤¾à¤¤ येईल.''
"गायरान जमिनीचे रकà¥à¤·à¤£ करणे हे सरà¥à¤µà¤¾à¤‚त महतà¥à¤¤à¥à¤µà¤¾à¤šà¥‡ आहे. याविषयी सरकार नवीन योजना व पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤µ तयार करीत असून, विविध राजà¥à¤¯ सरकारांनाही लेखी सूचना देणà¥à¤¯à¤¾à¤¤ येणार आहेत. वनांमधà¥à¤¯à¥‡ काही कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° गायींसाठी पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• व दरà¥à¤œà¥‡à¤¦à¤¾à¤° चारानिरà¥à¤®à¤¿à¤¤à¥€à¤¸à¤¾à¤ ी राखीव ठेवणà¥à¤¯à¤¾à¤šà¤¾ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤µ आहे. हा चारा शेतकरी व गोशाळांना मोफत पà¥à¤°à¤µà¤¿à¤£à¥à¤¯à¤¾à¤¤ येईल,'' अशी माहिती जावडेकर यांनी दिली.
गायींची तसà¥à¤•री व कतà¥à¤¤à¤² करणà¥à¤¯à¤¾à¤šà¥à¤¯à¤¾ घटनांची तातडीने दखल घेऊन तà¥à¤¯à¤¾à¤šà¤¾ अहवाल à¤à¤•-दोन महिनà¥à¤¯à¤¾à¤‚त वन खातà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¾ पाठविणà¥à¤¯à¤¾à¤šà¤¾ आदेश देशातील पशू कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ मंडळांना दिला आहे. यामà¥à¤³à¥‡ अशा घटनांमधà¥à¤¯à¥‡ सरकारला कारवाई करणे शकà¥à¤¯ होईल, असे जावडेकर मà¥à¤¹à¤£à¤¾à¤²à¥‡.
सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤° दूध उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ पà¥à¤°à¤•लà¥à¤ª :
देशी गायींसाठी सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤° दूध उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ पà¥à¤°à¤•लà¥à¤ª उà¤à¤¾ करणà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¤¾à¤ ी कृषी मंतà¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯à¤¾à¤¨à¥‡ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤µ मंजूर केला आहे. "à¤-2' नावाचा हा उपकà¥à¤°à¤® पà¥à¤°à¤¥à¤® ओडिशा व करà¥à¤¨à¤¾à¤Ÿà¤•मधà¥à¤¯à¥‡ उà¤à¤¾à¤°à¤£à¥à¤¯à¤¾à¤¤ येणार असून, नंतर हरियानातील करà¥à¤¨à¤¾à¤²à¤®à¤§à¥à¤¯à¥‡ तो सà¥à¤°à¥‚ करणà¥à¤¯à¤¾à¤šà¤¾ विचार आहे, अशी माहिती केंदà¥à¤°à¥€à¤¯ कृषिमंतà¥à¤°à¥€ राधामोहनसिंह यांनी दिली. राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ गोकूळ मोहिमेसाठी मोदी सरकारने गेली दोन वरà¥à¤·à¥‡ 582 कोटी रà¥à¤ªà¤¯à¤¾à¤‚चा निधी मंजूर केला होता. पूरà¥à¤µà¥€à¤šà¥à¤¯à¤¾ आघाडी सरकारने गायींचà¥à¤¯à¤¾ संवरà¥à¤§à¤¨à¤¾à¤¸à¤¾à¤ ी केवळ 45 कोटींची तरतूद केली होती, असे तà¥à¤¯à¤¾à¤‚नी सांगितले. "गाय ही देशाचा अरà¥à¤¥à¤µà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¥‡à¤šà¤¾ कणा आहे. जà¥à¤¯à¤¾à¤šà¥à¤¯à¤¾à¤•डे गायी आहेत, मग तो दलित असो अथवा अनà¥à¤¯ कोणतà¥à¤¯à¤¾à¤¹à¥€ शेतकऱà¥à¤¯à¤¾à¤šà¤¾ à¤à¥‚कबळी जाणार नाही, अशी गà¥à¤µà¤¾à¤¹à¥€ कृषिमंतà¥à¤°à¥à¤¯à¤¾à¤‚नी दिली.
तीरà¥à¤¥à¤‚कर महावीर सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ का जनà¥à¤® चैतà¥à¤° शà¥à¤•à¥à¤² तà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤¦à¤¾à¤¶à¥€ को उतà¥à¤¤à¤°à¤¾ फालà¥à¤—à¥à¤¨à¥€ नकà¥à¤·à¤¤à¥à¤° के दिन वैशाली के गणनायक राजा सिदà¥à¤§à¤¾à¤°à¥à¤¥ के घर हà¥à¤† था! महावीर सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ का तीरà¥à¤¥à¤‚कर के रूप में जनà¥à¤® उनके पिछले जनà¥à¤®à¥‹à¤‚ की सततॠसाधना का परिणाम था! कहा गया है कि à¤à¤• समय महावीर सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ का जीव पà¥à¤°à¥à¤°à¤µà¤¾ à¤à¥€à¤² था! संयोगवश उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने सागरसेन नाम के मà¥à¤¨à¤¿à¤°à¤¾à¤œ के दरà¥à¤¶à¤¨ किये! मà¥à¤¨à¤¿à¤°à¤¾à¤œ रासà¥à¤¤à¤¾ à¤à¥‚ल जाने के कारण इधर आ निकले थे! मà¥à¤¨à¤¿à¤°à¤¾à¤œ के धरà¥à¤®à¥‹à¤ªà¤¦à¥‡à¤¶ से उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने धरà¥à¤® धारण किया! महावीर सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ के जीवन कि वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• साधना का मारà¥à¤— यहीं से पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤®à¥à¤ होता है! बीच में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कौन-कौन से मारà¥à¤—ों से जाना पड़ा, जीवन में कà¥à¤¯à¤¾-कà¥à¤¯à¤¾ बाधाà¤à¤‚ आयीं और किस पà¥à¤°à¤•ार à¤à¤Ÿà¤•ना पड़ा? यह à¤à¤• लमà¥à¤¬à¥€ और दिलचसà¥à¤ª कहानी है, जो सनà¥à¤®à¤¾à¤°à¥à¤— का अवलमà¥à¤¬à¤¨ कर जीवन के विकास कि पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ देती है! उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¥‹à¤—ों को अनंत बार à¤à¥‹à¤—ा, फिर à¤à¥€ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ तृपà¥à¤¤à¤¿ नहीं हà¥à¤ˆ! अतः उनका à¤à¥‹à¤—ों से मन हट गया, जब किसी चीज कि चाह नहीं रही, परकीय संयोगों से बहà¥à¤¤ कà¥à¤› छà¥à¤Ÿà¤•ारा मिल गया! फिर जो रह गया उससे à¤à¥€ छà¥à¤Ÿà¤•ारा पाकर महावीर सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ की रह पर चले!
मारà¥à¤—शीरà¥à¤· कृषà¥à¤£ दसम सोमवार, ५६९ ईसा पूरà¥à¤µ को मà¥à¤¨à¤¿ दीकà¥à¤·à¤¾ लेकर वरà¥à¤§à¤®à¤¾à¤¨ सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ ने शालवृकà¥à¤· के नीचे तपसà¥à¤¯à¤¾ आरमà¥à¤ कर दी! उनकी तप साधना बड़ी कठिन थी! महावीर सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ कि साधना मौन साधना थी, जब तक उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पूरà¥à¤£ जà¥à¤žà¤¾à¤¨ की उपलबà¥à¤§à¤¿ नहीं हो गयी, तब तक उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने किसी को उपदेश नहीं दिया! गौतम उनके पà¥à¤°à¤®à¥à¤– शिषà¥à¤¯ (गणधर) हà¥à¤! उनकी धरà¥à¤®à¤¸à¤à¤¾ समवसरण कहलायी! इसमें मनà¥à¤·à¥à¤¯, पशà¥-पकà¥à¤·à¥€ आदि सà¤à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥€ उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ होकर धरà¥à¤®à¥‹à¤‚पदेश का लाठलेते थे!
लगà¤à¤— ३० वरà¥à¤· तक उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने सारे देश में à¤à¥à¤°à¤®à¤£ कर लोकà¤à¤¾à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤•ृत में सदà¥à¤ªà¤¦à¥‡à¤¶ दिया और कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ का मारà¥à¤— बतलाया! संसार-समà¥à¤¦à¥à¤° से पार होने के लिठउनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने तीरà¥à¤¥ कि रचना की, अत: वे तीरà¥à¤¥à¤‚कर कहलाये!
आचारà¥à¤¯ समंतà¤à¤¦à¥à¤° ने à¤à¤—वान के तीरà¥à¤¥ को सरà¥à¤µà¥‹à¤¦à¤¯ तीरà¥à¤¥ कहा है! वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के हित के साथ-साथ महावीर के उपदेश में समषà¥à¤Ÿà¤¿ के हित कि बात à¤à¥€ निहित थी! उनका उपदेश मानव मातà¥à¤° के लिठसिमित नहीं था, बलà¥à¤•ि पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥€ मातà¥à¤° के हित कि à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ उसमें निहित थी! महावीर à¤à¥à¤°à¤®à¤£ परमà¥à¤ªà¤°à¤¾ के उन वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में से थे जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने यह उदघोष किया था कि पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥€à¤®à¤¾à¤¤à¥à¤° समान है, मनà¥à¤·à¥à¤¯ और कà¥à¤·à¥à¤¦à¥à¤° कीट-पतंग में आतà¥à¤®à¤¾ के असà¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ कि अपेकà¥à¤·à¤¾ कोई अंतर नहीं है! उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने समाज में अहिंसा के महतà¥à¤µ को पà¥à¤¨à¤°à¥à¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ किया!
à¤à¤—वान महावीर सà¥à¤µà¤¯à¤‚ बड़े गौà¤à¤•à¥à¤¤ à¤à¥€ थे, सà¤à¥€ जीवों को à¤à¤• समान मानते हà¥à¤ à¤à¥€ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ गौमाता से विशेष सà¥à¤¨à¥‡à¤¹ रहा, तà¤à¥€ तो उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को ६०,००० गायों के पालन का आदेश दिया! इस बात से यह सिदà¥à¤§ होता है कि à¤à¤—वान महावीर सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ न केवल गौà¤à¤•à¥à¤¤ थे बलà¥à¤•ि वे समाज को अहिंसक, संसà¥à¤•ारी, पà¥à¤°à¤—तिशील आदि बनाने में गौमाता की à¤à¥‚मिका से à¤à¤²à¥€-à¤à¤¾à¤‚ति परिचित थे!
जब जैन धरà¥à¤® चरम पर था तो जैन धरà¥à¤®à¥€ गोरकà¥à¤·à¤¾ में सदैव सकà¥à¤°à¥€à¤¯ रहते थे! उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने विशाल गोशालाà¤à¤ निरà¥à¤®à¤¿à¤¤ की और गौ पालन को जीवनशैली बनाया! उस समय गायों पर कà¥à¤°à¥‚रता, उनकी हतà¥à¤¯à¤¾ आदि पर क़ानूनी पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤‚ध था! उस समय गायों की संखà¥à¤¯à¤¾ से किसी के à¤à¥€ धन का आकलन होता था! जैन धरà¥à¤® दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ समाज à¤à¤µà¤‚ धरà¥à¤® को गौमाता से किस तरह जोड़ा à¤à¤µà¤‚ समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया गया इसके कà¥à¤› उदहारण हमें इतिहास में मिलते है, जैसे –
उस समय में सरà¥à¤µà¤¾à¤§à¤¿à¤• गायों के १० सà¥à¤µà¤¾à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को ‘राजगृह ‘महाशतक’ à¤à¤µà¤‚ ‘काशियचà¥à¤²à¥à¤¨à¤¿à¤ªà¤¿à¤¤à¤¾’ कि समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ उपाधि दी जाती थी!
à¤à¤•-à¤à¤• वà¥à¤°à¤œ गोकà¥à¤² में १०,००० गायें हà¥à¤† करती थी!
à¤à¤—वान महावीर सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ के अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¥€ आनंद ने ८ गोकà¥à¤² संचालित करने का संकलà¥à¤ª लिया था!
à¤à¤—वान महावीर सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ ने नारा बà¥à¤²à¤‚द किया था कि पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• आतà¥à¤®à¤¾ परमातà¥à¤®à¤¾ बन सकती है! करà¥à¤®à¥‹à¤‚ के कारण आतà¥à¤®à¤¾ का असली सà¥à¤µà¤°à¥‚प अà¤à¤¿à¤µà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ नहीं हो पता है! करà¥à¤®à¥‹à¤‚ को नाश कर शà¥à¤¦à¥à¤§ बà¥à¤¦à¥à¤§ निरंजन और सà¥à¤–रूप सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ किया जा सकता है! इस पà¥à¤°à¤•ार तीस वरà¥à¤· तक सतà¥à¤µ का à¤à¤²à¥€-à¤à¤¾à¤à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° करते हà¥à¤ à¤à¤—वान महावीर अंतिम समय मलà¥à¤²à¥‹à¤‚ कि राजधानी पावा पहà¥à¤‚चे! वहाठके उपवन में कारà¥à¤¤à¤¿à¤• कृषà¥à¤£ अमावसà¥à¤¯à¤¾ मंगलवार, ५२ॠई .पू. के à¥à¥¨ वरà¥à¤· की आयॠमें उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने निरà¥à¤µà¤¾à¤£ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ किया!
गोबर की कà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¤¾ में ठहरेंगे मोदी !
अनादिकाल से मानवजाति गोमाता की
सेवा कर अपने जीवन को सà¥à¤–ी,
समà¥à¤°à¤¦à¥à¤§, निरोग, à¤à¤¶à¥à¤µà¤°à¥à¤¯à¤µà¤¾à¤¨ à¤à¤µà¤‚
सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤²à¥€ बनाती चली आ रही है.
गोमाता की सेवा के माहातà¥à¤®à¥à¤¯ से
शासà¥à¤¤à¥à¤° à¤à¤°à¥‡ पड़े है. आईये शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ की
गो महिमा की कà¥à¤› à¤à¤²à¤•ियां देखे -
गौ को घास खिलाना कितना पà¥à¤£à¥à¤¯à¤¦à¤¾à¤¯à¥€
..............................................
तीरà¥à¤¥ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ में जाकर सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ दान से
जो पà¥à¤¨à¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होता है, बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¤£à¥‹à¤‚ को
à¤à¥‹à¤œà¤¨ कराने से जिस पà¥à¤¨à¥à¤¯ की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿
होती है, समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ वà¥à¤°à¤¤-उपवास,
तपसà¥à¤¯à¤¾, महादान तथा हरी की आराधना
करने पर जो पà¥à¤¨à¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होता है,
समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ पà¥à¤°à¤¥à¥à¤µà¥€ की परिकà¥à¤°à¤®à¤¾,
समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ वेदों के पढने तथा समसà¥à¤¤
यजà¥à¤žà¥‹ के करने से मनà¥à¤·à¥à¤¯ जिस पà¥à¤¨à¥à¤¯
को पाता है, वही पà¥à¤¨à¥à¤¯ बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤®à¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¥à¤·
गौओ को खिलाकर पा लेता है !
गौ सेवा से वरदान की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿
.................................
जो पà¥à¤°à¥à¤· गौओ की सेवा और सब पà¥à¤°à¤•ार
से उनका अनà¥à¤—मन करता है, उस पर
संतà¥à¤·à¥à¤Ÿ होकर गौठउसे अतà¥à¤¯à¤‚त दà¥à¤°à¥à¤²à¤
वर पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करती है !
गौ सेवा से मनोकामनाओ की पूरà¥à¤¤à¥€
..........................................
गौ की सेवा याने गाय को चारा डालना,
पानी पिलाना, गाय की पीठसहलाना,
रोगी गाय का ईलाज करवाना आदि
करनेवाले मनà¥à¤·à¥à¤¯ पà¥à¤¤à¥à¤°, धन, विदà¥à¤¯à¤¾,
सà¥à¤– आदि जिस-जिस वसà¥à¤¤à¥ की ईचà¥à¤›à¤¾
करता है, वे सब उसे पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हो जाती
है, उसके लिठकोई à¤à¥€ वसà¥à¤¤à¥ दà¥à¤°à¥à¤²à¤
नहीं होती.
à¤à¤—वानॠशिव कहते है-हे पारà¥à¤µà¤¤à¥€!
समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ गौठजगत में शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ है. वे
लोगो को जीविका देने के कारà¥à¤¯ में
पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤ हà¥à¤ˆ है. वे मेरे अधीन है और
चनà¥à¤¦à¥à¤°à¤®à¤¾ के अमृतमय दà¥à¤°à¤µ से पà¥à¤°à¤•ट हà¥à¤ˆ
है. वे सौमà¥à¤¯, पà¥à¤¨à¥à¤®à¤¯à¥€, कामनाओं की
पूरà¥à¤¤à¥€ करने वाली तथा पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤¨à¥€ है.
इसलिठपà¥à¤¨à¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ की इचà¥à¤›à¤¾ वालो
को सदैव गायो की पूजा, सेवा (घास
आदि खिलाना , पानी पिलाना, रोगी गाय
का ईलाज कराना आदि-आदि) करनी
चाहिठ!
à¤à¥‚मि दोष समापà¥à¤¤ होते है
.............................
गौओ का समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ जहा बैठकर
निरà¥à¤à¤¯à¤¤à¤¾à¤ªà¥‚रà¥à¤µà¤• साà¤à¤¸ लेता है, उस
सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ की शोà¤à¤¾ को बाधा देता है और
वह के सारे पापो को खीच लेता है !
सबसे बड़ा तीरà¥à¤¥ गौ सेवा
.............................
देवराज इंदà¥à¤° कहते है- गौओ में सà¤à¥€
तीरà¥à¤¥ निवास करते है. जो मनà¥à¤·à¥à¤¯ गाय
की पीठछोटा है और उसकी पूछ को
नमसà¥à¤•ार करता है वह मानो तीरà¥à¤¥à¥‹ में
तीन दिनों तक उपवास पूरà¥à¤µà¤• रहकर
सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ कर देता है !
असार संसार छेह सार पदारà¥à¤¥
..................................
à¤à¤µà¤¾à¤¨ विषà¥à¤£à¥, à¤à¤•ादशी वà¥à¤°à¤¤, गंगानदी,
तà¥à¤²à¤¸à¥€, बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤£ और गौठ- ये ६ इस
दà¥à¤°à¥à¤—म असार संसार से मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ दिलाने
वाले है !
मंगल होगा
...............
जिसके घर बछड़े सहित à¤à¤• à¤à¥€ गाय
होती है, उसके समसà¥à¤¤ पापà¥à¤¨à¤¾à¤·à¥à¤Ÿ हो
जाते है और उसका मंगल होता है.
जिसके घर में à¤à¤• à¤à¥€ गौ दूध देने वाले न
हो उसका मंगल कैसे हो सकता है और
उसके अमंगल का नाश कैसे हो सकता
है !
à¤à¤¸à¤¾ न करे
..............
गौओ, बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¤£à¥‹à¤‚ तथा रोगियों को जब
कà¥à¤› दिया जाता है उस समय जो न देने
की सलाह देते है. वे मरकर पà¥à¤°à¥‡à¤¤ बनते
है !
गोपूजा - विषà¥à¤£à¥à¤ªà¥‚जा
.......................
à¤à¤—वानॠविषà¥à¤£à¥ देवराज इनà¥à¤¦à¥à¤° से कहते
है के हे देवराज! जो मनà¥à¤·à¥à¤¯ अशà¥à¤µà¤¤à¥à¤¥
वृकà¥à¤·, गोरोचन और गौ की सदा पूजा
सेवा करता है, उसके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ देवताओं,
असà¥à¤°à¥‹ और मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚ सहित समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£
जगत की à¤à¥€ पूजा हो जाते है. उस रूप में
उसके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ की हà¥à¤ˆ पूजा को मई
यथारà¥à¤¥ रूप से अपनी पूजा मानकर
गà¥à¤°à¤¹à¤£ करता हूठ!
गोधूली महान पापो की नाशक है
........................................
गायो के खà¥à¤°à¥‹ से उठी हà¥à¤ˆ धूलि, धानà¥à¤¯à¥‹
की धूलि तथा पà¥à¤Ÿ के शरीर में लगी धूलि
अतà¥à¤¯à¤‚त पवितà¥à¤° à¤à¤µà¤‚ महापापो का नाश
करने वाले है !
चारो समान है
.................
नितà¥à¤¯ à¤à¤¾à¤—वत का पाठकरना, à¤à¤—वानà¥
का चिंतन, तà¥à¤²à¤¸à¥€ को सीचना और गौ
की सेवा करना ये चारो समान है !
गो सेवा के चमतà¥à¤•ार
.........................
गौओ के दरà¥à¤¶à¤¨, पूजन, नमसà¥à¤•ार,
परिकà¥à¤°à¤®à¤¾, गाय को सहलाने, गोगà¥à¤°à¤¾à¤¸
देने तथा जल पिलाने आदि सेवा के
दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ मनà¥à¤·à¥à¤¯ दà¥à¤°à¥à¤²à¤ सिधिया पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤
होती है.
गो सेवा से मनà¥à¤·à¥à¤¯ की मनोकामनाà¤
जलà¥à¤¦ ही पूरी हो जाती है.
गाय के शरीर में सà¤à¥€ देवी-देवता, ऋषि
मà¥à¤¨à¤¿, गंगा आदि सà¤à¥€ नदिया तथा तीरà¥à¤¥
निवास करते है. इसीलिये गोसेवा से
सà¤à¥€ की सेवा का फल मिल जाता है.
गे को पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® करने से - धरà¥à¤®, अरà¥à¤¥,
काम और मोकà¥à¤· इन चारो की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿
होती है. अतः सà¥à¤– की इचà¥à¤›à¤¾ रखने वाले
बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤®à¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¥à¤· को गायो को निरंतर
पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® करना चाहिà¤.
ऋषियों ने सरà¥à¤µà¤¶à¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ और सरà¥à¤µà¤ªà¥à¤°à¤¥à¤®
किया जाने वाला धरà¥à¤® गोसेवा को ही
बताया है.
पà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤ƒà¤•ाल सरà¥à¤µà¤ªà¥à¤°à¤¥à¤® गाय का दरà¥à¤¶à¤¨
करने से जेवण उनà¥à¤¨à¤¤ होता है.
यातà¥à¤°à¤¾ पर जाने से पहले गाय का दरà¥à¤¶à¤¨
करके जाने से यातà¥à¤°à¤¾ मंगलमय होती है.
जिस सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर गाये रहती है, उससे
काफी दूरतक का वातावरण शà¥à¤¦à¥à¤§ à¤à¤µà¤‚
पवितà¥à¤° हो है, अतः गोपालन करना
चाहिà¤.
à¤à¤—वानॠविषà¥à¤£à¥ à¤à¥€ गोसेवा से सरà¥à¤µà¤¾à¤§à¤¿à¤•
पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ होते है, गोसेवा करनेवाले
कोअनायास ही गोलोक की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ हो
जाती है.
पà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤ƒà¤•ाल सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤ अरà¥à¤µà¥à¤ªà¥à¤°à¤¥à¤®
गाय का सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶ करने से पाप नषà¥à¤Ÿ होते
है !
गोदà¥à¤—à¥à¤§ - धरती का अमृत
...............................
गाय का दूश धरती का अमृत है. विशà¥à¤µ
में गोदà¥à¤®à¥à¤—à¥à¤§ के सामान पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• आहार
दूसरा कोई नहीं है. गाय के दूध को
पूरà¥à¤£ आहार माना गया है. यह
रोगनिवारक à¤à¥€ है. गाय के दूध का कोई
विकलà¥à¤ª नहीं है. यह à¤à¤• दिवà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥
है.
वैसे à¤à¥€ गाय के दूध का सेवन करना
गोमाता की महान सेवा करना ही है.
कà¥à¤¯à¥‹à¤•ि इससे गोपालन को बढ़ावा
मिलता है और अपà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤•à¥à¤· रूप से गाय
की रकà¥à¤·à¤¾ ही होती है. गाय के दूध का
सेवन कर गोमाता की रकà¥à¤·à¤¾ में योगदान
तो सà¤à¥€ दे ही सकते है.
पंचगवà¥à¤¯
...........
गाय के दूध, दही, घी, गोबर रस, गो-
मूतà¥à¤° का à¤à¤• निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ अनà¥à¤ªà¤¾à¤¤ में
मिशà¥à¤°à¤£ पंचगवà¥à¤¯ कहलाता है. पंचगवà¥à¤¯
का सेवन करने से मनà¥à¤·à¥à¤¯ के समसà¥à¤¤
पाप उसी पà¥à¤°à¤•ार à¤à¤¸à¥à¤® हो जाते है, जैसे
जलती आग से लकड़ी à¤à¤¸à¥à¤® हो जाते है.
मानव शरीर à¤à¤¸à¤¾ कोई रोग नहीं है,
जिसका पंचगवà¥à¤¯ से उपचार नहीं हो
सकता. पंचगवà¥à¤¯ से पापजनित रोग à¤à¥€
नषà¥à¤Ÿ हो जाते है.
यदि गो-दà¥à¤—à¥à¤§ सेवन के पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° को
अधिक महतà¥à¤¤à¥à¤µ दिया जाय तो गोवध तो
अपने आप ही धीरे-धीरे बंद हो —
गौ माता जीस जगह खडी रहकर आनंद पà¥à¤°à¥à¤µà¤• चैन की सांस लेती है। वहा वासà¥à¤¤à¥ दोष समापà¥à¤¤ हो जाते है।
गौ माता मे तैतीस कोटी देवी देवताओं का वास है।
गौ माता जीस जगह खà¥à¤¶à¥€ से रà¤à¤¾à¤‚ने से देवी देवता पà¥à¤·à¥à¤ª वरà¥à¤·à¤¾ करते है।
गौ माता के गले मे घंटी जरूर बांधे गाय के गले मे घंटी बजने से गौ आरती होती है।
जो वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ गौ माता की सेवा पà¥à¤œà¤¾ करता है। उस पर आने वाली सà¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ार की विपदाओं को गौ माता हर लेती है।
गौ माता के खà¥à¤°à¥à¤° मे नागदेवता का वास होता है। जहा गौ माता विचरण करती है। उस जगह साप बिचà¥à¤›à¥‚ नही आते है।
गौ माता के गोबर मे लकà¥à¤·à¥à¤®à¥€ जी का वास होता है
गौ माता के मà¥à¤¤à¥à¤° मे गंगाजी का वास होता है।
गौ माता के गोबर से बने उपलो का रोजाना घर दà¥à¤•ान मंदिर परिसरो पर धà¥à¤ª करने से वातावरण शà¥à¤¦à¥à¤§ होता सकारातà¥à¤®à¤• ऊरà¥à¤œà¤¾ मिलती है
गौ माता के à¤à¤• आख मे सà¥à¤°à¥à¤¯ व दà¥à¤¸à¤°à¥€ आख मे चनà¥à¤¦à¥à¤° देव का वास होता है।
गाय इस धरती पर साकà¥à¤·à¤¾à¤¤ देवता है।
गौ माता अनà¥à¤¨à¤ªà¥‚रà¥à¤£à¤¾ देवी है कामधेनॠहै। मनोकामना पूरà¥à¤£ करने वाली है।
गौ माता के दà¥à¤§ मे सà¥à¤µà¤°à¥à¤£ ततà¥à¤µ पाया जाता है जो रोगो की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को कम करता है।
गौ माता की पà¥à¤› मे हनà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤œà¥€ का वास होता है। कीसी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को बà¥à¤°à¥€ नजर हो जाये तो गौ माता की पà¥à¤› से à¤à¤¾à¤¡à¤¾ लगाने से नजर उतर जाती है।
गौ माता की पीठपर à¤à¤• उà¤à¤°à¤¾ हà¥à¤† कà¥à¤¬à¤‚ड होता है। उस कà¥à¤¬à¤‚ड मे सà¥à¤°à¥à¤¯ केतॠनाडी होती है। रोजाना सà¥à¤¬à¤¹ आधा घंटा गौ माता की कà¥à¤¬à¤‚ड हाथ फेरने से रोगो का नाश होता है
गौ माता का दà¥à¤§ अमृत है
गौ माता धरà¥à¤® की धà¥à¤°à¥€ है।
गौ माता के बिना धरà¥à¤® कि कलपना नही कि जा सकती गौ माता जगत जननी है।
गौ माता पृथà¥à¤µà¥€ का रूप है
गौ माता सरà¥à¤µà¥‹ देवमयी सरà¥à¤µà¥‹à¤µà¥‡à¤¦à¤®à¤¯à¥€ है। गौ माता के बिना देवो वेदो की पà¥à¤œà¤¾ अधà¥à¤°à¥€ है।
à¤à¤• गौ माता को चारा खिलाने से तैतीस कोटी देवीदेवताओ को à¤à¥‹à¤— लग जाता है।
गौ माता से ही मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹ के गौतà¥à¤° की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ हà¥à¤ˆ है।
गौ माता चौदह रतà¥à¤¨à¥‹ मे à¤à¤• रतà¥à¤¨ है।
गौ माता साकà¥à¤·à¤¾à¤¤ मा à¤à¤µà¤¾à¤¨à¥€ का रूप है।
गौ माता के पंचगवà¥à¤¯ के बिना पà¥à¤œà¤¾ पाठहवन सफल नही होते है।
गौ माता के दà¥à¤§ घी मखà¥à¤–न दही गोबर गोमà¥à¤¤à¥à¤° से बने पंचगवà¥à¤¯ हजारो रोगो की दवा है। इसके सेवन से असाधà¥à¤¯ रोग मीट जाते है
गौ माता को घर पर रखकर सेवा करने वाला सà¥à¤–ी आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• जीवन जीता है। उनकी अकाल मृतà¥à¤¯à¥ नही होती है।
तन मन धन से जो मनà¥à¤·à¥à¤¯ गौ सेवा करता है। वो वैतरणी गौ माता की पà¥à¤› पकड कर पार करता है। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ गौलोकधाम मे वास मीलता है
गौ माता के गोबर से इधंन तैयार होता है।
गौ माता सà¤à¥€ देवी देवताओं मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹ की आराधà¥à¤¯ है इषà¥à¤Ÿ देव है।
साकेत सà¥à¤µà¤°à¥à¤— इनà¥à¤¦à¥à¤° लोक से à¤à¥€ उचà¥à¤šà¤¾ गौ लोक धाम है।
गौ माता के बिना संसार की रचना अधà¥à¤°à¥€ है।
गौ माता मे दिवà¥à¤¯ शकà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾ होने से संसार का संतà¥à¤²à¤¨ बना रहता है।
गाय माता के गौवंशो से à¤à¥à¤®à¥€ को जोत कर की गई खेती सरà¥à¤µà¤¶à¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤Ÿ खेती होती है
गौ माता जीवन à¤à¤° दà¥à¤§ पिलाने वाली माता है। गौ माता को जननी से à¤à¥€ उचà¥à¤šà¤¾ दरà¥à¤œà¤¾ दिया गया है।
जंहा गौ माता निवास करती है। वह सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ तिरà¥à¤¥ धाम बन जाता है।
गौ माता कि सेवा परिकà¥à¤°à¤®à¤¾ करने से सà¤à¥€ तिरà¥à¤¥à¥‹ के पà¥à¤£à¥à¤¯à¥‹ का लाठमीलता है।
जीस वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ की रेखा सोई हà¥à¤ˆ हो तो वो वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ अपनी हथेली मे गà¥à¤¡ को रखकर गौ माता को जीठसे चटाये गौ माता की जीà¤
हथेली पर रखे गà¥à¤¡ को चाटने से वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की सोई हà¥à¤ˆ à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ रेखा खà¥à¤² जाती है।
गौ माता के चारो चरणो के बीच से निकल कर परिकà¥à¤°à¤®à¤¾ करने से इंसान à¤à¤¯ मà¥à¤•à¥à¤¤ हो जाता है।
गाय माता आनंद पà¥à¤°à¥à¤µà¤• सासें लेती है । छोडती है। वहा से नकारातà¥à¤®à¤• ऊरà¥à¤œà¤¾ à¤à¤¾à¤— जाती है। सकारातà¥à¤®à¤• ऊरà¥à¤œà¤¾ की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ होती है। वातावरण शà¥à¤¦à¥à¤§ होता है
गौ माता के गरà¥à¤ से ही महान विदà¥à¤µà¤¾à¤¨ धरà¥à¤® रकà¥à¤·à¤• गौ करà¥à¤£ जी महाराज पैदा हà¥à¤ थे
गौ माता की सेवा के लिठही इस धरा पर देवी देवताओं ने अवतार लीये है।
जब गौ माता बछडे को जनà¥à¤® देती तब पहला दà¥à¤§ बांज सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ को पिलाने से उनका बांजपन मीट जाता है।
सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ गौ माता का गौ मà¥à¤¤à¥à¤° को रोजाना दो तोला सात पट कपडे मे छानकर सेवन करने से सारे रोग मीट जाते है !
गौ माता वातà¥à¤¸à¤²à¥à¤¯ à¤à¤°à¥€ निगाहों से जीसे à¤à¥€ देखती है। उनके उपर गौकृपा हो जाती है !
गाय इस संसार का पà¥à¤°à¤¾à¤£ है।
काली गाय की पà¥à¤œà¤¾ करने से नोह गà¥à¤°à¤¹ शांत रहते है। जो मन पà¥à¤°à¥à¤µà¤• धरà¥à¤® के साथ गौ पà¥à¤œà¤¨ करता है। उनको शतà¥à¤°à¥ दोषो से छà¥à¤Ÿà¤•ारा मीलता है।
गाय धारà¥à¤®à¤¿à¤• आरà¥à¤¥à¤¿à¤• व सांसà¥à¤•ृतिक आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से सरà¥à¤µà¤—à¥à¤£ संपनà¥à¤¨ है।
गाय à¤à¤• चलता फीरता मंदिर है। हमारे सनातन धरà¥à¤® में तैतिस कोटी देवी देवता है। हम रोजाना तैतीस कोटी देवी देवताओं के मंदिर जा कर उनके दरà¥à¤¶à¤¨ नही कर सकते पर गौ माता के दरà¥à¤¶à¤¨ से सà¤à¥€ देवी देवताओं के दरà¥à¤¶à¤¨ हो जाते है।
कोई à¤à¥€ शà¥à¤ कारà¥à¤¯ अटका हà¥à¤† हो बार बार पà¥à¤°à¤¯à¤¤à¥à¤¨ करने पर à¤à¥€ सफन नही हो रहा हो तो गौ माता के कान मे कहीये रूका हà¥à¤† काम बन जायेगा
जो वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ मोकà¥à¤· गौ लोक धाम चाहता हो उसे गौ वà¥à¤°à¤¤à¥€ बनना चाहिठ।
गौ माता सरà¥à¤µ सà¥à¤–ों की दातार है।
मैं पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• बà¥à¤§à¥à¤¦à¤¿à¤®à¤¾à¤¨à¥ मनà¥à¤·à¥à¤¯ को कह रहा हूठकि यह गाय रूदà¥à¤° की माठहैं, वसॠकी बेटी है तथा आदितà¥à¤¯ की बहन के समान हैं | यह गाय दूध, दही, घी, मकà¥à¤–न रूप अमृत का खजाना है | इसलिठइस निरपराध, मारने के अयोगà¥à¤¯ गाय को तू मत मार ||
वैदिक विधान (ऋगà¥à¤µà¥‡à¤¦ ८/१०१/१५)
यकà¥à¤·à¤—ीता मे यकà¥à¤· ने यà¥à¤§à¤¿à¤·à¥à¤ र से कई पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ किये जिसमे à¤à¤• पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ यह à¤à¥€ था ' किममृतमॠ' - अमृत कà¥à¤¯à¤¾ है ? जिस पर यà¥à¤§à¤¿à¤·à¥à¤ र ने उतà¥à¤¤à¤° दिया ' गवामृतमॠ' - गोदà¥à¤—à¥à¤§ ही अमृत है । आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ शासà¥à¤¤à¥à¤° के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° गो दà¥à¤—à¥à¤§ सà¥à¤¨à¤¿à¤—à¥à¤§ , मधà¥à¤° , शीतल , à¤à¤µà¤‚ समसà¥à¤¤ रोगों का नाशक है जिसमे पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• ततà¥à¤¤à¥à¤µà¥‹à¤‚ का à¤à¤£à¥à¤¡à¤¾à¤° है - ४% पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ , ५% शरà¥à¤•रा , ४% वसा , ८à¥% जल तथा १-२% अनà¥à¤¯ ततà¥à¤¤à¥à¤µà¥‹à¤‚ के अलावा ११ पà¥à¤°à¤•ार के विटामिनà¥à¤¸ à¤à¤µà¤‚ ८ पà¥à¤°à¤•ार के पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ , ३ पà¥à¤°à¤•ार की दà¥à¤—à¥à¤§ गैस तथा १२ पà¥à¤°à¤•ार के पिगमेंटस à¤à¥€ पाये जाते हैं । गौ दà¥à¤—à¥à¤§ मे पाया जाने वाला सेरिवà¥à¤°à¥‹à¤¸à¤¾à¤‡à¤¸ मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• और सà¥à¤®à¤°à¤£ शकà¥à¤¤à¤¿ के विकास मे सहायक होता है व सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¨à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤¨ अणॠविकारों का पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• होता है , MDGI पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ के कारण रकà¥à¤¤ कोशिकाओं मे कैंसर पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ नही करता तथा गाय के दूध से कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤² à¤à¥€ नही बनता ।
à¤à¥ˆà¤‚स के दूध की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ मे गाय के दूध मे केरोटीन १० गà¥à¤¨à¤¾ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पाया जाता है जबकि विटामिन ' ठ' सिरà¥à¤« गाय के दूध मे ही पाया जाता है किसी à¤à¥€ अनà¥à¤¯ के दूध मे नही । à¤à¥ˆà¤‚स के दूध को गरम करने पर उसके पोषक ततà¥à¤¤à¥à¤µ मर जाते है जब कि गाय के दूध मे à¤à¥ˆà¤¸à¤¾ नही होता । ममतामयी à¤à¤µà¤‚ सातà¥à¤¤à¥à¤µà¤¿à¤• होने के कारण गौमाता का दूध à¤à¥€ सातà¥à¤¤à¥à¤µà¤¿à¤• , पतला à¤à¤µà¤‚ सà¥à¤ªà¤¾à¤šà¥à¤¯ होता है । गाय के दूध का कोई विकलà¥à¤ª नही है , विशà¥à¤µ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ संगठन के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° माठके दूध के बाद गाय का दूध ही मानव के लिये शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ है । दà¥à¤°à¥à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ से आधà¥à¤¨à¤¿à¤•ता के चलते à¤à¥ˆà¤‚स का दूध पी पी कर आधà¥à¤¨à¤¿à¤• मानव की बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ à¤à¥€ à¤à¥ˆà¤‚स जैसी जड़ हो गयी है ।
गौ माता हमेशा सà¥à¤µà¤šà¥à¤› à¤à¤µà¤‚ सà¥à¤µà¤šà¥à¤› मे ही रहना à¤à¥€ पसंद करती है , वे कà¤à¥€ à¤à¥€ कीचड़ या अनà¥à¤¯ गंदगी मे नही रहती हैं । मजबूरीवश उनà¥à¤¹à¥‡ रहना पड़े यह à¤à¤• अलग बात है । अगर आप को रोड कà¥à¤°à¤¾à¤¸ करती हà¥à¤¯à¥€ गाय दिखेगी तो वे हारà¥à¤¨ बजाने पर तà¥à¤°à¤‚त आगे चली जायेंगीं जबकि à¤à¥ˆà¤‚स को हारà¥à¤¨ देने पर à¤à¥€ - à¤à¥ˆà¤‚स या तो सà¥à¤¨à¥‡à¤—ी नही या फिर जड़ बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ धीरे धीरे जायेगी । गौ माता का नवजात बछड़ा दूध पी कर हिरण की तरह कà¥à¤²à¤¾à¤à¤šà¥‡ à¤à¤°à¥‡à¤—ा जबकि à¤à¥ˆà¤‚स का पाडा इधर उधर डोलेगा । à¤à¥ˆà¤‚स पशॠहै जिसका दूध बहà¥à¤¤ ही कम देशों मे सेवन किया जाता है ।
सऊदी अरब के अलखिराज मे अलशफीज ( मेहरबान- कृपालॠ) मे ३५ हज़ार गायें है जिसमे ५ हज़ार à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ नसà¥à¤² की गायें है । इन गायों को वहाठकाटा नही जाता है अपितॠइनका दूध रियाद सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ शाही महल मे जाता है , शाही परिवार को à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ नसà¥à¤² की गायों का दूध ही पसंद आता है । वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤•ों की मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ है १० गà¥à¤°à¤¾à¤® घी जलाने से १ टन आकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ पैदा होती है तथा वायà¥à¤®à¤£à¥à¤¡à¤² मे à¤à¤Ÿà¤¾à¤®à¤¿à¤• रेडिà¤à¤¶à¤¨ का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ कम हो जाता है ।
सà¤à¥€ गाय जैसी दिखने वाली गौमाता नही होती हैं , सिरà¥à¤« à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ नसà¥à¤² की गायें जिनके पीठपर गà¥à¤‚बद ( शिवलिंग ) होता है वही गौमाता कहलाती हैं । इसी रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ मे सà¥à¤°à¥à¤¯à¤•ेतॠनाड़ी होती है जो सूरà¥à¤¯ की किरणों को गà¥à¤°à¤¹à¤£ करती है और इसके कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤¶à¥€à¤² होने पर वह पीले रंग का पदारà¥à¤¥ - ' सà¥à¤µà¤°à¥à¤£à¤¾à¤•à¥à¤·à¤° ' छोड़ती है जिसके कारण देशी गाय का दूध , मकà¥à¤–न , घी ( पीला ) सà¥à¤µà¤°à¥à¤£à¤•ानà¥à¤¤à¤¿ यà¥à¤•à¥à¤¤ होता है और इसीलिये गौ माता हमेशा सूरà¥à¤¯ के पà¥à¤°à¤•ाश मे ही रहना पंसद करती हैं ।
देशी गाय की रंगो के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° दूध के गà¥à¤£ à¤à¥€ बदल जाते है , लाल रंग की गाय का दूध - पितà¥à¤¤à¤¨à¤¾à¤¶à¤• होता है , सफ़ेद रंग की गाय का दूध कफनाशक होता है , काले रंग की गाय का दूध पितà¥à¤¤à¤¨à¤¾à¤¶à¤• होता है । दोपहर मे पिया जाने वाला गौ दà¥à¤—à¥à¤§ - बलवरà¥à¤§à¤• , कफ पितà¥à¤¤à¤¨à¤¾à¤¶à¤• होता है तथा रात मे पिया जाने वाला गौ दà¥à¤—à¥à¤§ - दà¥à¤°à¥à¤¬à¤²à¤¤à¤¾ , बà¥à¤¢à¤¼à¤¾à¤ªà¤¾ दूरवकरने वाला होता है । चरकसंहिता अनà¥à¤¸à¤¾à¤°
सà¥à¤µà¤¾à¤¦à¥ शीतं मृदॠसà¥à¤¨à¤¿à¤—à¥à¤§à¤‚ बहलं शà¥à¤²à¤•à¥à¤·à¥à¤£à¤ªà¤¿à¤šà¥à¤›à¤²à¤®à¥ ।
गà¥à¤°à¥ मनà¥à¤¦à¤‚ पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨à¤‚ च गवà¥à¤¯à¤‚ दशगà¥à¤£à¤‚ पय: ।।
गौ दà¥à¤—à¥à¤§ के दस गà¥à¤£ बताये गये हैं - सà¥à¤µà¤¾à¤¦à¤¿à¤·à¥à¤Ÿ , शीतल , कोमल , चिकना , गाढ़ा , सौमà¥à¤¯ , लसदार , à¤à¤¾à¤°à¥€ , बाहरी पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ को विलमà¥à¤¬ से गà¥à¤°à¤¹à¤£ करने वाला तथा मन को पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ करने वाला होता है । इसी तरह सà¥à¤¶à¥à¤°à¥à¤¤à¤¸à¤‚हिता अनà¥à¤¸à¤¾à¤° गाय के दूध के दही को à¤à¥€ सà¥à¤¨à¤¿à¤—à¥à¤§ , विपाक मे मधà¥à¤° , पाचक , बलवरà¥à¤§à¤• , वातनाशक , शà¥à¤¦à¥à¤§ à¤à¤µà¤‚ रà¥à¤šà¤¿à¤•ारक कहा गया है ।
सà¥à¤¨à¤¿à¤—à¥à¤§à¤‚ विपाके मधà¥à¤°à¤‚ दीपनं बलवरà¥à¤§à¤¨à¤®à¥ ।
वातापहं पवितà¥à¤°à¤‚ च दधि गवà¥à¤¯à¤‚ रà¥à¤šà¤¿à¤ªà¥à¤°à¤¦à¤®à¥ ।।
।। वनà¥à¤¦à¥‡ गौ मातरमॠ।।
आज के इस विधà¥à¤µà¤‚सक à¤à¤µà¤‚ हिंसक वातावरण की तीवà¥à¤°à¤¤à¤¾ को समà¤à¤¤à¥‡ हà¥à¤ ही हम “शà¥à¤°à¥€ शंखेशà¥à¤µà¤° जैन यà¥à¤µà¤¾ मंडल” के सà¤à¥€ सदसà¥à¤¯ यह पà¥à¤°à¤£ लेते हà¥à¤ “अहिंसा गोशाला” का कारà¥à¤¯ सन २००२ से सà¥à¤šà¤¾à¤°à¥‚ रूप से चला रहे है कि हमारे संसà¥à¤•ार, हमारी संसà¥à¤•ृती की हम यथा संà¤à¤µ रकà¥à¤·à¤¾ कर सकें, à¤à¤—वान महावीर à¤à¤µà¤‚ सà¤à¥€ महातà¥à¤®à¤¾à¤“ं के संदेश “जीओ और जीने दो” को यथाशकà¥à¤¤à¥€ साकार कर सकें !
यदी हम इतिहास के पनà¥à¤¨à¥‹à¤‚ को पलटकर देखेंगे तो जानेंगे कि कà¥à¤¯à¥‹ हमारा महान देश à¤à¤¾à¤°à¤¤ खà¥à¤¶à¤¹à¤¾à¤², समृदà¥à¤§ और सà¥à¤œà¤²à¤¾à¤® – सà¥à¤«à¤²à¤¾à¤® था ! कà¥à¤¯à¥‹à¤•ि मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚ की संखà¥à¤¯à¤¾ से कई गà¥à¤¨à¤¾ अधिक गायों की संखà¥à¤¯à¤¾ होती थी, बैलों की संखà¥à¤¯à¤¾ थी ! इन गायों – बैलों की वजह से ही समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¤¾à¤°à¤¤ परिशà¥à¤°à¤®à¥€ था ! बैलों से खेत जोता जाता था, आवागमन का माधà¥à¤¯à¤® था, खूब मेहनत करते थे और फिर गाय का दूध, दही, घी, आदी के सेवन से संपूरà¥à¤£ à¤à¤¾à¤°à¤¤ शकà¥à¤¤à¤¿, सà¥à¤«à¥‚रà¥à¤¤à¤¿, बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿, करà¥à¤£à¤¾ का धनी था !
गोपालन से à¤à¤¾à¤°à¤¤ वासियों में परोपकारिता, जीवदया , ममतà¥à¤µ, की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ कूट कूट कर à¤à¤°à¥€ हà¥à¤ˆ थी ! गोधन से पूरा देश समà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ था, ना कोई किसी का शतà¥à¤°à¥‚ था, ना किसी को किसी से इरà¥à¤·à¥à¤¯à¤¾ , ना मोह था ! उस समय किसी à¤à¥€ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ को सà¥à¤µà¤°à¥à¤— में जाने की इचà¥à¤›à¤¾ ही नहीं होती थी ! कà¥à¤¯à¥‹à¤•ि हमारा देश, हमारी संसà¥à¤•ृती , हमारी धरती ही सà¥à¤µà¤°à¥à¤— से à¤à¥€ सà¥à¤‚दर हà¥à¤† करती थी !
हमारी “जीओ और जीने दो” की संसà¥à¤•ृती ही हमारे देश की रीढ की मजबूत हडà¥à¤¡à¥€ थी जो दà¥à¤¸à¤°à¥‡ देशों के मà¥à¤•ाबले हमें १००० गà¥à¤¨à¤¾ शकà¥à¤¤à¤¿à¤¶à¤¾à¤²à¥€ साबित करती थी ! इसीलिठमà¥à¤˜à¤²à¥‹à¤‚ ने और ततà¥à¤ªà¤¶à¥à¤šà¤¾à¤¤ अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥‹ ने सबसे पहले हमारी à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं को, हमारी संसà¥à¤•ृती को निशाना बनाते हà¥à¤ उसपर वार किया और छल कपट, कूट निति से हमपर शासन करते हà¥à¤ अपना जहर फैलाया और आज विशà¥à¤µà¤¶à¤•à¥à¤¤à¥€ बनने की खोखली होड में इस देश का यह आलम है कि जिस धरती पर कà¤à¥€ “दूधो नहाओ पूतो फलो” की पà¥à¤°à¤¥à¤¾ चलती थी, जिस धरापर “गाय” को माता की तरह पूजते थे, दूध की नदियाठबहती थी उसी धरा को “गाय” के खून से लहू लूहान किया जा रहा है ! संसà¥à¤•ृत देश में संसà¥à¤•ृती को लजà¥à¤œà¤¿à¤¤ किया जा रहा है, उसकी धजà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤ उडाई जा रही है ! आधà¥à¤¨à¤¿à¤•ीकरण à¤à¤µà¤® यांतà¥à¤°à¤¿à¤•ीकरण के नाम पर हम से हमारी बैल गाडियाठछिन लि गई ! ( बैल गाड़ियों का छिन जाना मतलब, मेहनत का छिन जाना, मेहनत का छिन जाना मतलब à¤à¥‚ख का छिन जाना, à¤à¥‚ख का छिन जाना मतलब à¤à¥‹à¤œà¤¨ का सेवन कम = कमजोरी = निरसता = आलसà¥à¤¯ = आसान शिकार/ गà¥à¤²à¤¾à¤®)
पाशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥€à¤•रण का मà¥à¤–ौटा पहनाकर देश के ठेकेदार देश को नीलाम कर आरहे है, गिरà¥à¤µà¥€ रख रहे है ! पूरे देश को à¤à¤• बहà¥à¤¤ ही बड़ी षडयंतà¥à¤° का शिकार बनाया जा रहा है ! à¤à¤• तरफ आधà¥à¤¨à¤¿à¤•ीकरण के नाम पर à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ माहौल बनाया जा रहा है, à¤à¤¸à¥‡ हालत पैदा किये जा रहे है, कि कृषी पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨ राषà¥à¤Ÿà¥à¤° का किसान और गà¥à¤µà¤¾à¤²à¥‡ अपना गोधन, पशà¥à¤§à¤¨, अपनी à¤à¥‚मि, बेचकर आतà¥à¤®à¤¹à¤¤à¥à¤¯à¤¾ करने को मजबà¥à¤° है और जिन सफ़ेद मगरमचà¥à¤›à¥‹ को हम अपने और देश के हित के लिठचà¥à¤¨à¤¤à¥‡ है, वो रोज़ घोटालों, के और महंगाई के तोहेफे हमें दे रहे है ! हमें बिलकà¥à¤² à¤à¥€ उमà¥à¤®à¥€à¤¦ नहीं है कि इस कलयà¥à¤— में कोई शकà¥à¤¤à¤¿ अवतरित होकर हमारे लिà¤, हमारे देश à¤à¤µà¤®à¥ हमारी संसà¥à¤•ृतिके लिठकà¥à¤› सà¥à¤–द à¤à¤µà¤®à¥ सकारातà¥à¤®à¤• करेगी ! अतः, अब यह संपूरà¥à¤£ तरहसे हमारी जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ है, हमारा दायितà¥à¤µ है कि इस दिशा में हम सà¤à¥€ à¤à¤• ठोस कदम उठाà¤à¤ !
इसी उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ से परम पिता परमेशà¥à¤µà¤° की कृपा से, पूजà¥à¤¯ गà¥à¤°à¥ à¤à¤—वंतो की शà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¿à¤°à¥à¤µà¤¾à¤¦ से, सोलापूर शà¥à¤°à¥€ संघ के अनमोल सहयोग से à¤à¤µà¤® आदरणीय पंडितवरà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€ कनà¥à¤à¤¾à¤ˆ शहा के पà¥à¤°à¤¬à¤² मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¨ से हम ‘शà¥à¤°à¥€ शंखेशà¥à¤µà¤° यà¥à¤µà¤¾ मंडल ’ के यà¥à¤µà¤• “अहिंसा गौशाला” का कारà¥à¤¯ संà¤à¤¾à¤² रहे है !
देश को बचाना है तो सबसे पहले संसà¥à¤•ृति को बचाना होगा, और संसà¥à¤•ृति को बचाना मतलब गोमाता को बचाना ! कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि गोमाता ही हमारे कृषी पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨ राषà¥à¤Ÿà¥à¤° की आतà¥à¤®à¤¾ है ! वह वैà¤à¤µ संपनà¥à¤¨à¤¤à¤¾ का केंदà¥à¤°, निरà¥à¤§à¤¨à¥‹à¤‚ का जीवन à¤à¤µà¤®à¥ धनवानों की शोà¤à¤¾ है ! शांत सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¾à¤µ की सजीव मूरà¥à¤¤à¤¿ तथा परोपकारिता की साकà¥à¤·à¤¾à¤¤ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤®à¤¾ है ! वह गोमाता हि थी जिसकी वजह से à¤à¤¾à¤°à¤¤ को विशà¥à¤µà¤—à¥à¤°à¥ होनेका सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हà¥à¤† था ! जैसा कि किसी महानपà¥à¤°à¥à¤· ने कहा है कि “ विशà¥à¤µ में जितना à¤à¥€ दà¥à¤ƒà¤– है वे जà¥à¤žà¤¾à¤¨ के आà¤à¤¾à¤µ में है” ( जानकारी की कमी से ) तो यदी गायों की सरà¥à¤µ सही उपयोगिता की जानकारी दी जाये तो किसान गà¥à¤µà¤¾à¤²à¥‡ तो कà¥à¤¯à¤¾, कसाई à¤à¥€ गो हतà¥à¤¯à¤¾ बंद कर देंगे !
वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤•ों की खोज के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° गौ दà¥à¤—à¥à¤§ में :-
यदि à¤à¤• वाकà¥à¤¯ में कहें तो, “ गाय बचेगी तो देश बचेगा !”
मगर आज दà¥à¤°à¥à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯à¤µà¤¶ हमारे देश में हर गाà¤à¤µ, शहर और महानगारों के सहसà¥à¤¤à¥à¤° बूचडखानों के साथ दरà¥à¤œà¤¨à¥‹à¤‚ यांतà¥à¤°à¤¿à¤• कतà¥à¤¤à¤¾à¤²à¥à¤–ानों में रोज लाखों गौà¤à¤ कट रही है ! मांसाहार के कारन हिंसा को बà¥à¤¾à¤µà¤¾ मिल रहा है ! ( ८०% से à¤à¥€ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ गायों को सà¥à¤µà¤¯à¤‚ सेवन के लिठनहीं बलà¥à¤•ि निरà¥à¤¯à¤¾à¤¤ के लिठकाटा जा रहा है ! लाखों गायों की तसà¥à¤•री हो रही है, आज à¤à¤¾à¤°à¤¤ विशà¥à¤µ का सबसे बड़ा गो-हतà¥à¤¯à¤¾à¤°à¤¾, गो- मांस निरà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¤• की सूची में शामिल है !)
à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ गोवंश का गला घोटा जा रहा है, इनà¥à¤¸à¤¾à¤¨à¤¿à¤¯à¤¤ बिक रही है और हमारे तथाकथित आज़ाद हिनà¥à¤¦à¥à¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤¨ कि सरकार आज à¤à¥€ à¤à¤¾à¤°à¤¤ के कई राजà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में गोवंश हतà¥à¤¯à¤¾ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤‚ध क़ानून लगाने में असमरà¥à¤¥ है और जिन राजà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में लगाया à¤à¥€ है तो वो केवल औपचारिकता के तौर पर ! à¤à¤¾à¤°à¤¤ जैसे कृषी पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨ देश में गोवंश की हतà¥à¤¯à¤¾ से बहà¥à¤¤ बड़ा नà¥à¤•सान हो रहा है और यदि मौत का यह तांडव रà¥à¤•ा नहीं तो हमारे देश को बद से बतà¥à¤¤à¤° हालातों का सामना करना पड सकता है ! इस बà¥à¤°à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤‚ड में जितने à¤à¥€ धरà¥à¤® है उन सà¤à¥€ का मूल सार दया, पà¥à¤°à¥‡à¤® और करà¥à¤£à¤¾ ही है और सृषà¥à¤Ÿà¤¿ के महान जिव होने के नाते हम मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚ का यह परम करà¥à¤¤à¤µà¥à¤¯ बनता है की हम सृषà¥à¤Ÿà¤¿ के सà¤à¥€ जीवों को जीने का अवसर दें, उनकी मदत करें ! इसीलिठहम “शà¥à¤°à¥€ शंखेशà¥à¤µà¤° जैन यà¥à¤µà¤¾ मंडल- सोलापूर” के यà¥à¤µà¤• आप शà¥à¤°à¥€ से हारà¥à¤¦à¤¿à¤• निवेदन करते हैं कि आप à¤à¥€ इस विषय में गंà¤à¤¿à¤°à¤¤à¤¾ से चिंतन करते हà¥à¤ "अहिंसा गोशाला " के इस शà¥à¤ कारà¥à¤¯ का हिसà¥à¤¸à¤¾ बने ! ताकी गो रकà¥à¤·à¤¾ हो सके, जिससे हमारा बिता हà¥à¤† गौरव हम पà¥à¤¨:शà¥à¤š पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर सकें ! वरना कहीं à¤à¤¸à¤¾ ना हो की हमारा गोधन हमेशा के लिठसमापà¥à¤¤ होकर विलà¥à¤ªà¥à¤¤ हो जाठऔर हमारी आनेवाली पिढी को ‘गाय’ मातà¥à¤° किताबों में देखने को मिले !
आप किसी à¤à¥€ माधà¥à¤¯à¤® से इस महान कारà¥à¤¯ में जà¥à¤¡ सकते है ! चाहे तन से, मन से, या चाहे धन से ! कहतें है कि“पà¥à¤°à¥‡à¤® बाटने से बà¥à¤¤à¤¾ है और गम बाटने से घटता है” जनà¥à¤®à¤¦à¤¿à¤¨, विवाह कि सालगिरह और खà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ कि à¤à¤¸à¥€ अनेक घडियों को हम अपने मितà¥à¤° सहपाठियों के साथ साथ गोशाला के अबोल पशà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को थोडीसी खà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ देकर (चारा, लापसी खिलाकर या दान देकर ) à¤à¥€ यादगार बना सकते है ! à¤à¤¸à¤¾ करने से उन गायों के आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ से हमारा à¤à¤µà¤®à¥ हमारे बचों का à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ और सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ अवशà¥à¤¯ ही उजà¥à¤µà¤² होगा और हमारे सà¥à¤µà¤°à¥à¤—वासी बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤—ों के नाम से à¤à¤¸à¤¾ करने पर उनकी आतà¥à¤®à¤¾ को à¤à¥€ परम शांती मिलेगी ! अपनी खà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को दà¥à¤—à¥à¤¨à¤¾ करने का à¤à¤µà¤®à¥ अपने सà¥à¤µà¤°à¥à¤—वासी बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤—ो को à¤à¤¾à¤µ à¤à¤°à¥€ शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤‚जली देने का इससे सà¥à¤‚दर अवसर शायद ही मिले !
मंडल का मà¥à¤–à¥à¤¯ लकà¥à¤·à¥à¤¯ गौरकà¥à¤·à¤¾ और जीवरकà¥à¤·à¤¾ होने से मंडल का कारà¥à¤¯ केवल गौशाला तक ही सिमित नहीं रखकर, गाà¤à¤µ- गाà¤à¤µ जाना, किसानों को पà¥à¤°à¤¬à¥‹à¤§à¤¨ करना, गायों की उपयोगीता à¤à¤µà¤® महतà¥à¤¤à¥à¤µ समà¤à¤¾à¤¨à¤¾ और पà¥à¤°à¤¸à¤‚ग पड़ने पर लावारिस गायों को चारा खिलाना, उनके छोटे-बडे ऑपरेशन करवाना आदी कारà¥à¤¯ à¤à¥€ शामिल है !
🔸नà¥à¤¯à¥à¤à¥€à¤²à¤‚डमधे लहान वयातील मà¥à¤²à¤¾à¤‚मधà¥à¤¯à¥‡ मधà¥à¤®à¥‡à¤¹à¤¾à¤šà¥‡ पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ पà¥à¤°à¤šà¤‚ड पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¤¾à¤¤ वाढले होते.तà¥à¤¯à¤¾à¤šà¥€ कारणे शोधणà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¤¾à¤ ी शासनाने तजà¥à¤œà¥à¤žà¤¾à¤‚ची समिती 1993 मधे नेमली होती.या समितीने मधà¥à¤®à¥‡à¤¹à¥€ लहान मà¥à¤²à¤¾à¤‚चà¥à¤¯à¤¾ आहाराचे जैवरासायनिक विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£ ( biochemical analysis ) केले तेवà¥à¤¹à¤¾ तà¥à¤¯à¤¾à¤‚चà¥à¤¯à¤¾ निदरà¥à¤¶à¤¨à¤¾à¤¸ धकà¥à¤•ादायक बाब आली ती मà¥à¤¹à¤£à¤œà¥‡ या सरà¥à¤µ रोगाचे कारण मà¥à¤¹à¤£à¤œà¥‡ जरà¥à¤¸à¥€ , होलà¥à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤¨ फà¥à¤°à¥€à¤œà¥€à¤¯à¤¨ , रेड डॅनिश या काउ चे दà¥à¤§ हे आहे.या संशोधनानंतर या विषयावर परत 97 वेळा विविध तजà¥à¤œà¥à¤žà¥à¤¯à¤¾à¤‚नी अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ केला.सरà¥à¤µà¤¾à¤‚चा निषà¥à¤•रà¥à¤· सारखाच आहे. à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯à¤¾à¤‚चे डोळे खाडकन उघडावे अशी घटना मà¥à¤¹à¤£à¤œà¥‡ जेवà¥à¤¹à¤¾ या शासà¥à¤°à¤œà¥à¤žà¤¾à¤‚नी à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ वंशाचà¥à¤¯à¤¾ गायीचà¥à¤¯à¤¾ दà¥à¤§à¤¾à¤šà¤¾ अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ केला तेवà¥à¤¹à¤¾ तà¥à¤¯à¤¾à¤‚चà¥à¤¯à¤¾ असे लकà¥à¤·à¤¾à¤¤ आले की à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ गायीचे दà¥à¤§ हे A2 पà¥à¤°à¤•ारचे असà¥à¤¨ ते आरोगà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¤¾à¤ ी अतà¥à¤¯à¤‚त उपयà¥à¤•à¥à¤¤ आहे .इतकेच नाही तर मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ हà¥à¤°à¤¦à¤¯à¤°à¥‹à¤— कॅनà¥à¤¸à¤° इ.विविध आजार दूर करणà¥à¤¯à¤¾à¤šà¥€ तà¥à¤¯à¤¾à¤®à¤§à¥‡ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ आहे.à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ देशी गायीचà¥à¤¯à¤¾ तà¥à¤ªà¤¾à¤®à¥à¤³à¥‡ हà¥à¤°à¤¦à¤¯à¤°à¥‹à¤—à¥à¤¯à¤¾à¤šà¥à¤¯à¤¾ रकà¥à¤¤à¤µà¤¾à¤¹à¤¿à¤¨à¥à¤¯à¤¾à¤‚मधील कोलेसà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‰à¤² दूर होते तर गोमà¥à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤®à¥à¤³à¥‡ कॅनà¥à¤¸à¤° बरा होतो.विचार करा आपलà¥à¤¯à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ ऋषीमà¥à¤¨à¥€à¤‚चा अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ किती सखोल होता ते.जे आधà¥à¤¨à¤¿à¤• शासà¥à¤¤à¥à¤°à¤œà¥à¤žà¤¾à¤‚ना समजायला इतकी वरà¥à¤·à¥‡ लागली की देशी गायीचे दà¥à¤§ तूप गोमूतà¥à¤° मानवी आरोगà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¤¾à¤ ी वरदान आहे हे हजारो वरà¥à¤·à¤¾à¤ªà¥à¤°à¥à¤µà¥€à¤š आपलà¥à¤¯à¤¾ आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¾à¤¤ सांगितलंय .जà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¥‡ महाà¤à¤¾à¤°à¤¤à¤¾à¤®à¤§à¥‡ कृषà¥à¤£à¤¾à¤²à¤¾ विषारी दà¥à¤§ पाजून मारायला पà¥à¤¤à¤¨à¤¾ नावाची राकà¥à¤·à¤¸à¥€à¤£ आली होती अगदी तà¥à¤¯à¤¾à¤š पधà¥à¤¦à¤¤à¥€à¤¨à¥‡ सधà¥à¤¯à¤¾ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯à¤¾à¤‚पà¥à¤¢à¥‡ जरà¥à¤¸à¥€ होलà¥à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤¨ फà¥à¤°à¥€à¤œà¥€à¤¯à¤¨ या पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤¯à¤¾à¤‚चà¥à¤¯à¤¾ दà¥à¤§à¤¾à¤šà¥‡ ओढवà¥à¤¨ घेतलेले संकट आहे असे कोणाला वाटलà¥à¤¯à¤¾à¤¸ तà¥à¤¯à¤¾à¤¤ अतिशयोकà¥à¤¤à¥€ नाही.
🔸 दà¥à¤§à¤¾à¤µà¤°à¥€à¤² या संशोधनामà¥à¤³à¥‡ नà¥à¤¯à¥à¤à¥€à¤²à¤‚ड , अमेरिका , ऑसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¤¾, बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¨ , बà¥à¤°à¤¾à¤à¥€à¤² या देशांमधे जरà¥à¤¸à¥€ ,होलà¥à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤¨ फà¥à¤°à¤¿à¤œà¤¿à¤¯à¤¨ या पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤¯à¤¾à¤‚चे A1 दूध पिणे बंद केले असà¥à¤¨ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ गायींचà¥à¤¯à¤¾ दà¥à¤§à¤¾à¤²à¤¾ पà¥à¤°à¤šà¤‚ड मागणी वाढली आहे.इतकेच काय पण तिथे विकलà¥à¤¯à¤¾ जाणाऱà¥à¤¯à¤¾ दà¥à¤§à¤¾à¤šà¥à¤¯à¤¾ पिशवà¥à¤¯à¤¾à¤‚वरही ते दà¥à¤§ A1 आहे की A2 आहे हे लिहिणà¥à¤¯à¤¾à¤šà¥‡ बंधन आहे.खरे तर à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤¾à¤¤à¤¹à¥€ दà¥à¤§à¤¾à¤šà¥à¤¯à¤¾ पिशवà¥à¤¯à¤¾à¤‚वर तà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥€à¤² दूध हे A1 आहे की A2 आहे हे लिहिणà¥à¤¯à¤¾à¤šà¥€ मागणी गà¥à¤°à¤¾à¤¹à¤•ांनी करायला हवी कारण आपण काय विकत घेतो तà¥à¤¯à¤¾à¤¬à¤¦à¥à¤¦à¤² जाणà¥à¤¨ घेणà¥à¤¯à¤¾à¤šà¤¾ गà¥à¤°à¤¾à¤¹à¤•ांना कायदà¥à¤¯à¤¾à¤¨à¥‡ पूरà¥à¤£ अधिकार असतो.जसे तंबाखू, सिगारेटचà¥à¤¯à¤¾ पॅकेटवर तà¥à¤¯à¤¾à¤šà¥‡ सेवन आरोगà¥à¤¯à¤¾à¤¸ घातक असलà¥à¤¯à¤¾à¤šà¥€ सूचना लिहिली जाते तà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¥‡ ...
🔸à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤¾à¤¤ मातà¥à¤° या बाबतीत पूरà¥à¤£ गोंधळच आहे.अजà¥à¤¨ आमà¥à¤¹à¤¾à¤²à¤¾ दà¥à¤§à¤¾à¤šà¥à¤¯à¤¾ A1 व A2 मधील फरकच माहित नाही.सरà¥à¤µà¤¸à¤¾à¤®à¤¾à¤¨à¥à¤¯ जनतेला गायीचे दूध (cow milk)या गोंडस नावाने जरà¥à¤¸à¥€ या घाणेरडà¥à¤¯à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤¯à¤¾à¤šà¥‡ रोगकारक A1 दà¥à¤§ विकले जाते.सधà¥à¤¯à¤¾ लोकाना आपली खरी गाय कोणती व विदेशी जरà¥à¤¸à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥€ कोणता हा फरकच समजानासा à¤à¤¾à¤²à¤¾à¤¯.इतका की अगदी Whats app चà¥à¤¯à¤¾ smileys मधे देखील हे जरà¥à¤¸à¥€à¤šà¥‡ चितà¥à¤° दिले आहे,तà¥à¤¯à¤¾à¤¸ आपण गैरसमजाने गाय समजतोय.देशी गाय व जरà¥à¤¸à¥€ हे à¤à¤•मेकांपासà¥à¤¨ पूरà¥à¤£ वेगळे आहेत.दोनà¥à¤¹à¥€ समोर ठेऊन निरीकà¥à¤·à¤£ करा मà¥à¤¹à¤£à¤œà¥‡ फरक समजेल. जरà¥à¤¸à¥€à¤šà¥‡ दà¥à¤§ पà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤²à¥à¤¯à¤¾à¤®à¥à¤³à¥‡ मधà¥à¤®à¥‡à¤¹à¤¾à¤šà¥‡ पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ पà¥à¤°à¤šà¤‚ड वाढले आहे.अगदी लहान मà¥à¤²à¤¾à¤‚मधà¥à¤¯à¥‡ देखील मधà¥à¤®à¥‡à¤¹à¤¾à¤šà¥‡ पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ खूप वाढले आहे.आमà¥à¤¹à¥€ à¤à¤•ीकडून मधà¥à¤®à¥‡à¤¹à¤¾à¤µà¤° उपाय मà¥à¤¹à¤£à¥‚न महागडी औषधे घेतो तर दà¥à¤¸à¤°à¥€à¤•डे गायीचे समजून जरà¥à¤¸à¥€à¤šà¥‡ A1 दà¥à¤§ पितो.कसा रोग बरा होणार ??आहे की नाही गोंधळ ??
🔸गेलà¥à¤¯à¤¾ 40 वरà¥à¤·à¤¾à¤‚पासà¥à¤¨ विदेशातून जरà¥à¤¸à¥€ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤¾à¤¤ आणलà¥à¤¯à¤¾ तेंवà¥à¤¹à¤¾à¤ªà¤¾à¤¸à¥‚न à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤¾à¤¤ मधà¥à¤®à¥‡à¤¹à¤¾à¤šà¥‡ पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ पà¥à¤°à¤šà¤‚ड वाढले आहे.आपलà¥à¤¯à¤¾ शासà¥à¤¤à¥à¤°à¤œà¥à¤žà¤¾à¤¨à¥€ शà¥à¤µà¥‡à¤¤à¤•à¥à¤°à¤¾à¤‚तीचà¥à¤¯à¤¾ नावाखाली à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ देशी गायींचे विदेशी जरà¥à¤¸à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤¯à¤¾à¤‚बरोबर संकर करà¥à¤¨ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ गायींचा वंश नासवला . तà¥à¤¯à¤¾à¤®à¥à¤³à¥‡ देशी गायींचà¥à¤¯à¤¾ 80 पैकी 57 जाती नामशेष à¤à¤¾à¤²à¥à¤¯à¤¾ व जरà¥à¤¸à¥€à¤šà¥‡ रोगकारक दूध पिणà¥à¤¯à¤¾à¤šà¥€ वेळ जनतेवर आली. à¤à¤•े काळी देशी गायींचà¥à¤¯à¤¾ दà¥à¤§à¤¾à¤¨à¥‡ समृधà¥à¤¦ असणाऱà¥à¤¯à¤¾ आपलà¥à¤¯à¤¾ देशात आज देशी गायीचे दूध मिळणे अवघड बनले.देशी गायीचे तूप मिळणे तर फारच दà¥à¤°à¥à¤®à¤¿à¤³ , कसेबसे राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤¾à¤¤à¥€à¤² पथमेडा या ठिकाणी शà¥à¤§à¥à¤¦ देशी गायींना जतन केले आहे . पà¥à¤°à¤¯à¤¤à¥à¤¨à¤ªà¥‚रà¥à¤µà¤• तेथील शà¥à¤§à¥à¤¦ गायीचे तà¥à¤ª मिळू शकते ही तà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¤²à¥à¤¯à¤¾ तà¥à¤¯à¤¾à¤¤ जमेची बाब.परदेशांनी मातà¥à¤° गेलà¥à¤¯à¤¾ काही वरà¥à¤·à¤¾à¤¤ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤¾à¤®à¤§à¥‚न देशी गायी नेऊन तà¥à¤¯à¤¾à¤‚ची उतà¥à¤¤à¤® शà¥à¤§à¥à¤¦ सà¥à¤µà¤°à¥à¤ªà¤¾à¤¤ जोपासना केली आहे.बà¥à¤°à¤¾à¤à¥€à¤²à¤®à¤§à¥‡ साठलकà¥à¤· शà¥à¤§à¥à¤¦ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ गीर गायी आहेत.तर मूळ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤¾à¤¤ तà¥à¤¯à¤¾à¤‚ची संखà¥à¤¯à¤¾ शिलà¥à¤²à¤• आहे फकà¥à¤¤ तीन हजार... बà¥à¤°à¤¾à¤à¥€à¤²à¤®à¤§à¥‡ à¤à¤•ा à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ गीर गायीचे दिवसाचे दूध उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ आहे 64 लिटर.(इंटरनेटवर ही सरà¥à¤µ माहिती आहे.)असे असà¥à¤¨à¤¹à¥€ आपले डोळे अजूनही उघडलेले नाहीत.à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤¾à¤¤ आजही दिवसाला लकà¥à¤·à¤¾à¤µà¤§à¥€ देशी गायींचा जरà¥à¤¸à¥€à¤¬à¤°à¥‹à¤¬à¤° संकर करà¥à¤¨ तà¥à¤¯à¤¾à¤‚चा वंश आपण नासवून विषारी बनवत आहोत.हे असेच चालू राहिले तर येतà¥à¤¯à¤¾ पाच वरà¥à¤·à¤¾à¤¤ देशी गायी à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤¾à¤¤à¥‚न नामशेष होतील असा इशारा तजà¥à¤œà¥à¤žà¤¾à¤‚नी à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤¾à¤²à¤¾ दिला आहे.
मितà¥à¤°à¤¾à¤‚नो , आपलà¥à¤¯à¤¾ घरी विकत घेतले जाणारे दूध खऱà¥à¤¯à¤¾ देशी गायीचे आहे की तà¥à¤¯à¤¾ नावाखाली जरà¥à¤¸à¥€à¤šà¥‡ दूध आहे हे तपासा. देशी गायीचà¥à¤¯à¤¾ दà¥à¤§à¤¾à¤šà¥‡ सेवन करà¥à¤¨ आरोगà¥à¤¯ सांà¤à¤¾à¤³à¤¾ . तसेच बाहेर जेवताना पनीर ,चीज हे कोणतà¥à¤¯à¤¾ दà¥à¤§à¤¾à¤ªà¤¾à¤¸à¥à¤¨ बनवले आहे याची खातà¥à¤°à¥€ करà¥à¤¨ आपले व कà¥à¤Ÿà¥à¤‚बाचे आरोगà¥à¤¯ जपा ही विनंती.
अतिशय छान माहिती.जासà¥à¤¤à¥€à¤¤ जासà¥à¤¤ लोकांपरà¥à¤¯à¤‚त हे सतà¥à¤¯ पोहोचवा ही विनंती .
Forwarded by Dr.Sunil Adangale , Ph.D. ,Animal Science and Dairy Tech.MPKV .Rahuri
चाकलेट का नाम सà¥à¤¨à¤¤à¥‡ ही बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में गà¥à¤¦à¤—à¥à¤¦à¥€ न हो, à¤à¤¸à¤¾ हो ही नहीं सकता। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को खà¥à¤¶ करने का पà¥à¤°à¤šà¤²à¤¿à¤¤ साधन है चाकलेट। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में ही नहीं, वरनॠकिशोरों तथा यà¥à¤µà¤¾ वरà¥à¤— में à¤à¥€ चाकलेट ने अपना विशेष सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ बना रखा है। पिछले कà¥à¤› समय से टॉफियों तथा चाकलेटों का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करने वाली अनेक कंपनियों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ अपने उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ में आपतà¥à¤¤à¤¿à¤œà¤¨à¤• अखादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ मिलाये जाने की खबरे सामने आ रही हैं। कई कंपनियों के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ में तो हानिकारक रसायनों के साथ-साथ गायों की चरà¥à¤¬à¥€ मिलाने तक की बात का रहसà¥à¤¯à¥‹à¤¦à¤˜à¤¾à¤Ÿà¤¨ हà¥à¤† है।
गà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤ के समाचार पतà¥à¤° गà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤ समाचार में पà¥à¤°à¤•ाशित à¤à¤• समाचार के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° नेसà¥à¤²à¥‡ यू.के.लिमिटेड दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ निरà¥à¤®à¤¿à¤¤ किटकेट नामक चाकलेट में कोमल बछड़ों के रेनेट (मांस) का उपयोग किया जाता है। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि किटकेट बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में खूब लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯ है। अधिकतर शाकाहारी परिवारों में à¤à¥€ इसे खाया जाता है। नेसà¥à¤²à¥‡ यू.के.लिमिटेड की नà¥à¤¯à¥‚टà¥à¤°à¤¿à¤¶à¤¨ आफिसर शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¤à¤¿ वाल à¤à¤¨à¥à¤¡à¤°à¥à¤¸à¤¨ ने अपने à¤à¤• पतà¥à¤° में बतायाः “ किटकेट के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ में कोमल बछड़ों के रेनेट का उपयोग किया जाता है। फलतः किटकेट शाकाहारियों के खाने योगà¥à¤¯ नहीं है। “ इस पतà¥à¤° को अनà¥à¤¤à¤°à¥à¤°à¤¾à¤·à¥à¤Ÿà¥€à¤¯ पतà¥à¤°à¤¿à¤•ा यंग जैनà¥à¤¸ में पà¥à¤°à¤•ाशित किया गया था।
सावधान रहो, à¤à¤¸à¥€ कंपनियों के कà¥à¤šà¤•à¥à¤°à¥‹à¤‚ से! टेलिविज़न पर अपने उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ को शà¥à¤¦à¥à¤§ दूध से बनते हà¥à¤ दिखाने वाली नेसà¥à¤²à¥‡ लिमिटेड के इस उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦ में दूध तो नहीं परनà¥à¤¤à¥ दूध पीने वाले अनेक कोमल बछड़ों के मांस की पà¥à¤°à¤šà¥à¤° मातà¥à¤°à¤¾ अवशà¥à¤¯ होती है।
हमारे धन को अपने देशों में ले जाने वाली à¤à¤¸à¥€ अनेक विदेशी कंपनियाठहमारे सिदà¥à¤§à¤¾à¤¨à¥à¤¤à¥‹à¤‚ तथा परमà¥à¤ªà¤°à¤¾à¤“ं को तोड़ने में à¤à¥€ कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¾à¤° तथा उदारीकरण की आड़ में à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤µà¤¾à¤¸à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
हालैणà¥à¤¡ की à¤à¤• कंपनी वैनेमैली पूरे देश में धड़लà¥à¤²à¥‡ से फà¥à¤°à¥‚टेला टॉफी बेच रही। इस टॉफी में गाय की हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का चूरा मिला होता है, जो कि इस टॉफी के डिबà¥à¤¬à¥‡ पर सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ रूप से अंकित होता है। इस टॉफी में हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के चूरà¥à¤£ के अलावा डालडा, गोंद, à¤à¤¸à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤• à¤à¤¸à¤¿à¤¡ तथा चीनी का मिशà¥à¤°à¤£ है, à¤à¤¸à¤¾ डिबà¥à¤¬à¥‡ पर फारà¥à¤®à¥‚ले (सूतà¥à¤°) के रूप में अंकित है। फà¥à¤°à¥‚टेला टॉफी बà¥à¤°à¤¾à¤œà¥€à¤² में बनाई जा रही है तथा इस कंपनी का मà¥à¤–à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ हालैणà¥à¤¡ के जà¥à¤¡à¤¿à¤†à¤ˆ शहर में है। आपतà¥à¤¤à¤¿à¤œà¤¨à¤• पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ से निरà¥à¤®à¤¿à¤¤ यह टॉफी à¤à¤¾à¤°à¤¤ सहित संसार के अनेक अनà¥à¤¯ देशों में à¤à¥€ धड़लà¥à¤²à¥‡ से बेची जा रही है।
चीनी की अधिक मातà¥à¤°à¤¾ होने के कारण इन टॉफियों को खाने से बचपन में ही दाà¤à¤¤à¥‹à¤‚ का सड़ना पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚ठहो जाता है तथा डायबिटीज़ à¤à¤µà¤‚ गले की अनà¥à¤¯ बीमारियों के पैदा होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ रहती है। हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के मिशà¥à¤°à¤£ à¤à¤µà¤‚ à¤à¤¸à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤• à¤à¤¸à¤¿à¤¡ से कैंसर जैसे à¤à¤¯à¤¾à¤¨à¤• रोग à¤à¥€ हो सकते हैं।
सनॠ1847 में अंगà¥à¤°à¤œà¥‹à¤‚ ने कारतूसों में गायों की चरà¥à¤¬à¥€ का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करके सनातन संसà¥à¤•ृति को खणà¥à¤¡à¤¿à¤¤ करने की साजिश की थी, परनà¥à¤¤à¥ मंगल पाणà¥à¤¡à¥‡à¤¯ जैसे वीरों ने अपनी जान पर खेलकर उनकी इस चाल को असफल कर दिया। अà¤à¥€ फिर यह नेसà¥à¤²à¥‡ कंपनी चालें चल रही है। अà¤à¥€ मंगल पाणà¥à¤¡à¥‡à¤¯ जैसे वीरों की ज़रूरत है। à¤à¤¸à¥‡ वीरों को आगे आना चाहिà¤à¥¤ लेखकों, पतà¥à¤°à¤•ारों को सामने आना चाहिà¤à¥¤ देशà¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚ को सामने आना चाहिà¤à¥¤ देश को खणà¥à¤¡-खणà¥à¤¡ करने के मलिन मà¥à¤°à¤¾à¤¦à¥‡à¤µà¤¾à¤²à¥‹à¤‚ और हमारी संसà¥à¤•ृति पर कà¥à¤ ाराघात करने वालों के सबक सिखाना चाहिà¤à¥¤ देव संसà¥à¤•ृति à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ समाज की सेवा में सजà¥à¤œà¤¨à¥‹à¤‚ को साहसी बनना चाहिà¤à¥¤ इस ओर सरकार का à¤à¥€ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ खिंचना चाहिà¤à¥¤
à¤à¤¸à¥‡ हानिकारक उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ के उपà¤à¥‹à¤— को बंद करके ही हम अपनी संसà¥à¤•ृति की रकà¥à¤·à¤¾ कर सकते हैं। इसलिठहमारी संसà¥à¤•ृति को तोड़नेवाली à¤à¤¸à¥€ कंपनियों के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ के बहिषà¥à¤•ार का संकलà¥à¤ª लेकर आज और अà¤à¥€ से à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संसà¥à¤•ृति की रकà¥à¤·à¤¾ में हम सबको कंधे-से-कंधा मिलाकर आगे आना चाहिà¤à¥¤
आज कल गायों को मारा जा रहा है... गौ हतà¥à¤¯à¤¾ पर मà¥à¤à¥‡
à¤à¤• कविता मिली वह कविता मैं आप सब के साथ शेयर
करना चाहता हूà¤...
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अमृत जैसा दूध पिला कर मैंने तà¥à¤®à¤•ो बड़ा किया......
अपने बचà¥à¤šà¥‡ से à¤à¥€ छीना पर मैंने तà¥à¤®à¤•ो दूध दिया...
रूखी सूखी खाती थी मैं, कà¤à¥€ न किसी को सताती थी मैं......
कोने में पड़ जाती थी मैं, दूध नहीं दे सकती अब तो गोबर से काम तो आती थी मैं....
मेरे उपलों की आग से तूने, à¤à¥‹à¤œà¤¨ अपना पकाया था.......
गोबर गैस से रोशन कर के तेरा घर उजलाया था.......
कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ मà¥à¤à¤•ो बेच रहा रे, उस कसाई के हाथों में...??
पड़ी रहूंगी इक कोने में, मत कर लालच माठहूठमैं.......
मर कर à¤à¥€ है कीमत मेरी, खाल à¤à¥€ तेरे काम आà¤......
मेरी हडà¥à¤¡à¥€ की कà¥à¤› कीमत, शायद तू ही घर लाà¤.......
मैं हूठतेरे कृषà¥à¤£ की पà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥€ वह कहता था जग से नà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥€......
उसकी बंसी की धà¥à¤¨ पर मैं, à¤à¥‚ली थी यह दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ सारी.......
मत कर बेटा तू यह पाप, अपनी माठको न बेच आप.......
रूखी सूखी खा लूà¤à¤—ी मैं किसी को नहीं सताऊà¤à¤—ी मैं तेरे
काम ही आई थी मैं
तेरे काम ही आउंगी मैं....!!!
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अगर आप गौ से पà¥à¤¯à¤¾à¤° करते हैं तो गौ माता की यह
पीड़ा जन जन तक पहà¥à¤à¤šà¤¾à¤¨à¥‡ के लिये कृपया कà¥à¤› पल का समय
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